कविता——-” देश के खातिर ” —– अनिकेतम्

0
75

गाडियोँ का काफिला, आगे बढ रहा था

अचानक आकाशध्वनि हुई —————

धरतीपुत्र , रूको !

और सोचो

क्या, उन आत्माओं को तुम ,

दुखित कर देना चाहते हो ?

जिनकी शहादत ने गोरे शासकों की नींद उडा दी

अपने वतन को जक़डी गुलामी से मुक्त करा दी

उनका ही शौर्य संप्रभु राष्ट्र का परिचायक बना .

और उन्हौने ही आपको देश का सिंहासन दिया

धरतीपुत्र रूके ! विचार किया, और

एक बार संप्रभु राष्ट्र को नमन किया,

फिर संकल्प लिया———-

नहीं, मैं ऐसा नहीं करूँगा

उन अस्तित्ववान अमर आत्माओं को,

जो शहीद होकर, आजादी के विहान की

लालिमा बने,

रक्तिम आभा बने,

लेकिन, गुमनाम रह गये —–

उन्हीं के ,

मजार पर चादर चढाऊँगा,

समाधि पर दीप जलाउँगा,

जनगणमन का गीत गाऊँगा,

वन्दे मातरम का नारा लगाऊँगा,

और तो और,

देश के खातिर अपना सर्वस्व लुटाउँगा

————————-

संक्षिप्त परिचय

डॉ विनय कुमार

उपप्राचार्य, जवाहर नवोदय विद्यालय,कोडरमा, झारखंड

.मेल – drkumarbinay@yahoo.com  मोबाईल — 9546842222.

शैक्षणिक योग्यता –  एम. . (हिन्दी), बी. एड. , पीएच. डी., पटना विश्वविद्यालय

रचनाऐं—-” मास्टर बीबी “, ” रिक्साबाला ” तथा अन्य कहानियाँ   गीत, गजल तथा अन्य कविताओं की रचना   समय समय पर आकाशवाणी पटना से प्रसारित वार्ता  ” वजीरा “महाकाव्य की रचना प्रस्तावित

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here