अति सुन्दर मनभावन पावन रूप तुम्हारा

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गीत

अति सुन्दर मनभावन पावन रूप तुम्हारा
तपते तन पर रिमझिम सावन रूप तुम्हारा

चित्त निवासिनी तुम सपनों की चित्रावाली भी
तुम कुसुम्भ कुसमासव और कुसुमावलि भी
हेमा हेमवती तुम ही दमयंती सी
प्रणय बल्लभा वारांगना किवदंती सी
राधा कान्हा का मन वृन्दावन रूप तुम्हारा
तपते तन पर रिमझिम सावन रूप तुम्हारा

नीर गंग मलयानिल तुम ही दो लोचन
राग रंग रमणी रूपा रसना रोचन
अरुणोदय की स्वर्णिम आभा दर्पण हो
घोर तिमिर में पूनम प्रीत समर्पण हो
जनकसुता हिय रघुनन्दन सा रूप तुम्हारा
तपते तन पर रिमझिम सावन रूप तुम्हारा

अवनि–अम्बर तक ज्योतिर्मय चंद्रप्रभा
धर दो जहां भी पग हो जाये इन्द्रसभा
पावन मंदिर का दीप तुम्हीं रोली चन्दन
तुम्हीं सखा प्रिय जन्मोजनम का हो बंधन
कमला–यमारि का स्वर्ण सिंहासन रूप तुम्हारा
तपते तन पर रिमझिम सावन रूप तुम्हारा
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द्वारा —-

वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ”

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