कविता — युग पुरूष नमन मैं करता हूँ   —   डॉ. विनय कुमार ‘अनिकेतम्’

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भारत माँ  के वीर सपूतो नमन तुझे मैं  करता हूँ ।

अटल, तुम्हारे चरणों में मैं शत-शत शीश झुकाता हूँ,

शील और तुम सदाचार के अवतारी थे वीर महान,

राजनीति के छल-छद्मों में खिले हुए थे कमल समान।

ओजमयी द्युतिमान पुरूष के चरणों में सर रखता हूँ ,

भारत के उस प्रखर चरित्र को भूल नहीं मैं सकता हूँ ।

भारत माँ ——

जय जवान और जय किसान के साथ विज्ञान का नारा था,

पोखरण परमाणु प्रयोग का अद्भुत खेल निराला था ।

राजनीति के उस विदेह को अर्पित अर्घ्य मैं करता हूँ ,

और नहीं तो चरणों में आँसू ही अर्पित करता हूँ ।

भारत ——-

लाहौर बस सर्बिस भी था पैगाम – ए – दोस्त सुलहकारी,

पर वह भी गर मान्य नहीं तो कारगिल फतह करा डाली ।

शांति और संघर्ष पुरूष के चरणों में शीश झुकाता हूँ ,

धन्य हुई धरती माता, युग –पुरूष नमन मैं करता हूँ ।

भारत —–

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संक्षिप्त परिचय

डॉ विनय कुमार

उप–प्राचार्य, जवाहर नवोदय विद्यालय,कोडरमा, झारखंड

ई.मेल – drkumarbinay@yahoo.com  मोबाईल — 9546842222.

शैक्षणिक योग्यता –  एम. ए. (हिन्दी), बी. एड. , पी–एच. डी., पटना विश्वविद्यालय ।

रचनाऐं—-” मास्टर बीबी “, ” रिक्साबाला ” तथा अन्य कहानियाँ ।  गीत, गजल तथा अन्य कविताओं की रचना ।  समयसमय पर आकाशवाणी पटना से प्रसारित वार्ता । ” वजीरा “महाकाव्य की रचना प्रस्तावित ।



 

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